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सच अपना-अपना होता है!

25 Jan 2026 | 28 views

रातों को ढलना होता है
सूरज को जलना होता है
सच अपना-अपना होता है!
एक धार मृदु बह जाती है
पत्थर पर चिह्न बनाती है
घाटों को रुकना होता है
नदियों को बहना होता है
सच अपना-अपना होता है!
सपने भरमाते रहते हैं
कुछ आते-जाते रहते हैं
फूलों को झड़ना होता है
कलियों को खिलना होता है
सच अपना-अपना होता है!
बीती बातें एक कहानी है
मन पत्थर,आँखें पानी है
पर्वत को जमना होता है
बादल को बरसना होता है
सच अपना-अपना होता है!
धूप जो जेठ झुलसाती है
वही पूस सँवर-सी जाती है
जब नभ कुछ धुँधला होता है
तारों को चमकना होता है
सच अपना-अपना होता है!
कुछ इन राहों से जाते हैं
कुछ राहों के ही हो जाते हैं
किसी का जो खो जाता है
वो किसी को मिलना होता है
सच अपना-अपना होता है!

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