जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
25 Jan 2026 | 13 views
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
रातें स्याही जैसी हैं, दिन सोने जैसा है
सब कुछ पा लेना, सब कुछ खोने जैसा है
जिसकी परत खुरदुरी है, वही है सच जैसा
सपने तो बिन कारण ही सुनहरे होते हैं
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
धूप का मोल चुका न पाए,वर्षा अमृत आई
बिन बोले चुपके पीठ से गुजर गई पुरवाई
जो कुछ कीमती है वह अगाध सबका है
पत्थर सम कौड़ियों पर झूठे पहरे होते हैं
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
तुममें क्या देखें और भला क्या ना देखें
पिघली आँखें देखें या पत्थर चेहरा देखें
उलझी मुस्कानों में तुम सब छिपा जाते हो
सच्ची आँखें होती हैं,झूठे चेहरे होते हैं
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
मेरा उन तक,उनका मुझ तक आना-जाना है
यह जो सब है,ये रिश्तों का ताना - बाना है
मन के भीतर ये माना कि हैं परत-दर-परत
भावों के धागे उनमें गूँथे एकहरे होते हैं
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
रातें स्याही जैसी हैं, दिन सोने जैसा है
सब कुछ पा लेना, सब कुछ खोने जैसा है
जिसकी परत खुरदुरी है, वही है सच जैसा
सपने तो बिन कारण ही सुनहरे होते हैं
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
धूप का मोल चुका न पाए,वर्षा अमृत आई
बिन बोले चुपके पीठ से गुजर गई पुरवाई
जो कुछ कीमती है वह अगाध सबका है
पत्थर सम कौड़ियों पर झूठे पहरे होते हैं
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
तुममें क्या देखें और भला क्या ना देखें
पिघली आँखें देखें या पत्थर चेहरा देखें
उलझी मुस्कानों में तुम सब छिपा जाते हो
सच्ची आँखें होती हैं,झूठे चेहरे होते हैं
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
मेरा उन तक,उनका मुझ तक आना-जाना है
यह जो सब है,ये रिश्तों का ताना - बाना है
मन के भीतर ये माना कि हैं परत-दर-परत
भावों के धागे उनमें गूँथे एकहरे होते हैं
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं!
Leave a Comment