मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
25 Jan 2026 | 26 views
एक दर्द आराम देता रहा
एक घाव मधु बरसाता रहा
वह मिला था पल भर को कभी
मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
बीतते हुए यादों की रश्मियाँ थीं
या अमावस के पहले की पूर्णिमा थी
बुझे हुए दीपक से किरण पाता रहा
वह मिला था पल भर को कभी
मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
हर किसी की अपनी कहानियाँ हैं
दीवारों से लौटती प्रतिध्वनियाँ हैं
मौन को ही गीत अपने सुनाता रहा
वह मिला था पल भर को कभी
मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
मिलन के कुछ भाव भूखे रह गए हैं
युगों से तट नदी के सूखे रह गए हैं
आँसुओं से प्यास अपनी बुझाता रहा
वह मिला था पल भर को कभी
मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
एक घाव मधु बरसाता रहा
वह मिला था पल भर को कभी
मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
बीतते हुए यादों की रश्मियाँ थीं
या अमावस के पहले की पूर्णिमा थी
बुझे हुए दीपक से किरण पाता रहा
वह मिला था पल भर को कभी
मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
हर किसी की अपनी कहानियाँ हैं
दीवारों से लौटती प्रतिध्वनियाँ हैं
मौन को ही गीत अपने सुनाता रहा
वह मिला था पल भर को कभी
मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
मिलन के कुछ भाव भूखे रह गए हैं
युगों से तट नदी के सूखे रह गए हैं
आँसुओं से प्यास अपनी बुझाता रहा
वह मिला था पल भर को कभी
मैं उम्र भर मुस्कुराता रहा!
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