तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
25 Jan 2026 | 11 views
अधरों में जो छिपा वो गीत तो पहचानते होगे
नयनों में जो घुली वो प्रीत तो तुम जानते होगे
इतना सोचा है,कितना सोचेंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
प्यास मन में मिलन की उतनी ही थी
द्वार से दूरी आँगन की उतनी ही थी
इतनी-सी दूरी भी तुम मिटा न सके
हम रहे थे जहाँ, वहीं पर होंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
ये जो सच न हो तो भी झूठी नहीं है
मोह छूटा है मगर डोर टूटी नहीं है
पार सीमा के तुमने क्यों सीमा गढ़ी
ये भूल कर भी अब कैसे भूलेंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
बहुत देर तक तुम उस उपवन में रहे थे
फूल कितने चुने, काँटे कितने चुभे थे
तुमने अंजुलि हमारी देखी तक नहीं
फूल ये अब जाकर किसे दे देंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
कुछ तुमने कही, कुछ हमने कही थी
ये कहानी तो अब भी बन ही रही थी
कथा-सूत्र के उस छोर पर तुम गए तो
कैसे अकेले कथा अब समेटेंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
नयनों में जो घुली वो प्रीत तो तुम जानते होगे
इतना सोचा है,कितना सोचेंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
प्यास मन में मिलन की उतनी ही थी
द्वार से दूरी आँगन की उतनी ही थी
इतनी-सी दूरी भी तुम मिटा न सके
हम रहे थे जहाँ, वहीं पर होंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
ये जो सच न हो तो भी झूठी नहीं है
मोह छूटा है मगर डोर टूटी नहीं है
पार सीमा के तुमने क्यों सीमा गढ़ी
ये भूल कर भी अब कैसे भूलेंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
बहुत देर तक तुम उस उपवन में रहे थे
फूल कितने चुने, काँटे कितने चुभे थे
तुमने अंजुलि हमारी देखी तक नहीं
फूल ये अब जाकर किसे दे देंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
कुछ तुमने कही, कुछ हमने कही थी
ये कहानी तो अब भी बन ही रही थी
कथा-सूत्र के उस छोर पर तुम गए तो
कैसे अकेले कथा अब समेटेंगे हम
तुम मिलोगे तो तुमसे पूछेंगे हम!
Leave a Comment