यही अंतिम याचना है!
25 Jan 2026 | 31 views
उनसे और नहीं कुछ चाहना है
यही अंतिम याचना है!
साँझ में दिशाओं के धुंधले छोर पर
रवि ने कुछ लिखा गगन के कोर पर
निशा की ये आदिम प्रस्तावना है
यही अंतिम याचना है!
हम भला उनका पता क्योंकर बताते
जो स्मरण भर से हमारे पास आते
मौन में ही प्रेम की संभावना है
यही अंतिम याचना है!
आँसुओं में भाव कितने बह गए हैं
शेष कुछ चिह्न नयन में रह गए हैं
अभाव ही हृदय की मूक भावना है
यही अंतिम याचना है!
प्रेम की तृप्ति से दूरी ही रहेगी
काल की गणना अधूरी ही रहेगी
कुछ छोड़ देना ही कुछ थामना है
यही अंतिम याचना है!
साथ जिनके नहीं कभी रह सकेंगे
बस उन्हीं को हम विदा न कह सकेंगे
कुछ काम्य न होना भी कामना है
यही अंतिम याचना है!
यही अंतिम याचना है!
साँझ में दिशाओं के धुंधले छोर पर
रवि ने कुछ लिखा गगन के कोर पर
निशा की ये आदिम प्रस्तावना है
यही अंतिम याचना है!
हम भला उनका पता क्योंकर बताते
जो स्मरण भर से हमारे पास आते
मौन में ही प्रेम की संभावना है
यही अंतिम याचना है!
आँसुओं में भाव कितने बह गए हैं
शेष कुछ चिह्न नयन में रह गए हैं
अभाव ही हृदय की मूक भावना है
यही अंतिम याचना है!
प्रेम की तृप्ति से दूरी ही रहेगी
काल की गणना अधूरी ही रहेगी
कुछ छोड़ देना ही कुछ थामना है
यही अंतिम याचना है!
साथ जिनके नहीं कभी रह सकेंगे
बस उन्हीं को हम विदा न कह सकेंगे
कुछ काम्य न होना भी कामना है
यही अंतिम याचना है!
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