जरूरी नहीं कि हाल दिल के सब सुना देते
जरूरी नहीं कि हाल दिल के सब सुना देते जब मिले थे तब जरा-सा तो मुस्कुरा देते तेरे-मेरे अफसाने भले सच हों या ना हों अपनी जबां से तुम अफवाह ही बता देते
जरूरी नहीं कि हाल दिल के सब सुना देते जब मिले थे तब जरा-सा तो मुस्कुरा देते तेरे-मेरे अफसाने भले सच हों या ना हों अपनी जबां से तुम अफवाह ही बता देते
चौखट पर कल तुम्हारे जब गया तो ये जाना लौट कर आता है फिर गुजरा हुआ जमाना पत्थर की मौन आँखों को आँसू पड़ा बहाना लौट कर आता है फिर गुजरा हुआ जमाना!
कुछ दर्द के हैं,कुछ आराम के हैं मेरे आँसू तेरे नाम के हैं! क्षार से अंगार हम सींच लेंगे डोर पतले हैं परंतु खींच लेंगे
जो गहरे होते हैं,वे ठहरे होते हैं! रातें स्याही जैसी हैं, दिन सोने जैसा है सब कुछ पा लेना, सब कुछ खोने जैसा है जिसकी परत खुरदुरी है, वही है सच जैसा
क्या बुरा था इसी द्वार सुबह से शाम हो जाती! उन गलियों से लौटे हैं कई बार हम खटखटाए हैं चुपचाप कई द्वार हम