मालूम नहीं कि कहाँ जाऊँगा!
25 Jan 2026 | 45 views
तुमसे मिलकर कुछ बता जाऊँगा
थोड़ी देर रुका हूँ ,चला जाऊँगा
मुझे रोशनी में तलाशा न करना
मैं दीये खुद ही सारे बुझा जाऊँगा
मेरी दास्तां न सुनाना किसी को
मैं अपनी ही कहानी भुला जाऊँगा
आँखों में बादल के अँधेरे घने हैं
मैं पिघले सारे आँसू बहा जाऊँगा
ये तन धूप नहीं,साये से जला है
मैं साये में थोड़ी धूप उगा जाऊँगा
जाना अब जरूरी है नियति में मेरी
मगर मालूम नहीं कि कहाँ जाऊँगा!
थोड़ी देर रुका हूँ ,चला जाऊँगा
मुझे रोशनी में तलाशा न करना
मैं दीये खुद ही सारे बुझा जाऊँगा
मेरी दास्तां न सुनाना किसी को
मैं अपनी ही कहानी भुला जाऊँगा
आँखों में बादल के अँधेरे घने हैं
मैं पिघले सारे आँसू बहा जाऊँगा
ये तन धूप नहीं,साये से जला है
मैं साये में थोड़ी धूप उगा जाऊँगा
जाना अब जरूरी है नियति में मेरी
मगर मालूम नहीं कि कहाँ जाऊँगा!
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