तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
25 Jan 2026 | 12 views
मैं प्रेम तो कर लूँ तुमसे किंतु
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
यह चंद्रमा हारा लगता है
अंबर भी कारा लगता है
इन भ्रमरों का गुंजार मधुर
फूलों का न क्रंदन हो जाए
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
अश्रु को ग्रीवा- हार करूँ
कैसे ये भेंट स्वीकार करूँ
तेरे पथ के रजकण रख लूँ
ये धूलि भी चंदन हो जाए
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
यही अनिच्छा अब इच्छा है
मिलन से बढ़कर प्रतीक्षा है
विस्मृति को ही स्मृति कर लूँ
यह साँस ही वंदन हो जाए
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
चलो,यहीं से विदा करते हैं
इसे मिलन की प्रथा करते हैं
विलग हुईं रेखाओं का कहीं
उस अनंत में संगम हो जाए
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
यह चंद्रमा हारा लगता है
अंबर भी कारा लगता है
इन भ्रमरों का गुंजार मधुर
फूलों का न क्रंदन हो जाए
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
अश्रु को ग्रीवा- हार करूँ
कैसे ये भेंट स्वीकार करूँ
तेरे पथ के रजकण रख लूँ
ये धूलि भी चंदन हो जाए
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
यही अनिच्छा अब इच्छा है
मिलन से बढ़कर प्रतीक्षा है
विस्मृति को ही स्मृति कर लूँ
यह साँस ही वंदन हो जाए
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
चलो,यहीं से विदा करते हैं
इसे मिलन की प्रथा करते हैं
विलग हुईं रेखाओं का कहीं
उस अनंत में संगम हो जाए
तुम्हें यह प्रेम न बंधन हो जाए!
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