जरूरी नहीं कि हाल दिल के सब सुना देते
जरूरी नहीं कि हाल दिल के सब सुना देते जब मिले थे तब जरा-सा तो मुस्कुरा देते तेरे-मेरे अफसाने भले सच हों या ना हों अपनी जबां से तुम अफवाह ही बता देते
जरूरी नहीं कि हाल दिल के सब सुना देते जब मिले थे तब जरा-सा तो मुस्कुरा देते तेरे-मेरे अफसाने भले सच हों या ना हों अपनी जबां से तुम अफवाह ही बता देते
तुमसे मिलकर कुछ बता जाऊँगा थोड़ी देर रुका हूँ ,चला जाऊँगा मुझे रोशनी में तलाशा न करना मैं दीये खुद ही सारे बुझा जाऊँगा
चौखट पर कल तुम्हारे जब गया तो ये जाना लौट कर आता है फिर गुजरा हुआ जमाना पत्थर की मौन आँखों को आँसू पड़ा बहाना लौट कर आता है फिर गुजरा हुआ जमाना!
हम वफा अपनी भला किसको सुनाने जाएँगे बहुत करेंगे तो फिर से तुम्हें आजमाने जाएँगे तुमसे कोई उलझन हो, ऐसी कोई बात नहीं है
उनसे और नहीं कुछ चाहना है यही अंतिम याचना है! साँझ में दिशाओं के धुंधले छोर पर रवि ने कुछ लिखा गगन के कोर पर
आशीष कुमार वर्मा भारत के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) के बावजूद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर एक नया इतिहास रचा। 2012 बैच के भारतीय रक्षा लेखा सेवा (IDAS) अधिकारी के रूप में वह वर्तमान में अपर नियंत्रक रक्षा लेखा (ACDA), पटना के पद पर कार्यरत हैं। प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी एक विशिष्ट पहचान है। पटना विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्वर्ण पदक विजेता आशीष कुमार वर्मा का काव्य संग्रह 'वारिधि' प्रकाशित हो चुका है। उनका जीवन शैक्षणिक उत्कृष्टता और शारीरिक सीमाओं पर विजय प्राप्त करने वाली सृजनात्मक शक्ति का प्रमाण है।
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